“तुम दर्द के साथ ऐसा
कैसे कर लेती हो?क्या तुम्हारा मन
सहम नही जाता है?” प्रतीक ने भरे लफ्जो मे पूंछ लिया।
“बीती हुइ बातो को
याद करके हम अपने आज को क्यों धुंधला कर ले। आज का ख्वाब ही तो है जो हमे जिंदा
रखा है”
ये शब्द उन होंठों
से थे जो अक्सर कराह लेते थे ,यें बातें उन होंठों से थी जो फिर भी मुस्करा लिया
करते थे
प्रतीक अपना बचा हुआ
सारा वक्त काजल के साथ ही बिताता था वह उसके बनाये गये खूबसूरत चित्रो मे कभी-कभी
खुद को ढूंढता तो कभी- कभी काजल के ख्वाबों को।
पेन्टिंग न करने के
लिए जब उसे कोई मना करता तो वह फूट पङती थी। “क्यों पेन्टिंग करना गुनाह है! नही ना। पेन्टिंग ही मेरी पहचान है यही मेरा
वजूद है,यही वो काम जिसे करके मै खिल जाती हुं, संवर जाती हुं जिसमे मै अपने आपको
ढूढ लेती हुं”
वह पहले मुस्कराकर
कहती थी, “ मुझे बस एक कमरा दे
दीजिए। जहॉ मै अकेले अपने रंगो को बिखेर सकुं।बस थोङा-सा मेरे खाने-पीने का मेरे
ध्यान रख दें। मै अपने आदत की गुलाम हुं कि बिन रंगो को बिखेरे सो नही सकती हुं कुछ
भी हो जाये मेरे खवाब हमेशा सजे ही रहेगें।”
सुबह जब सूर्य की
किरणे मुस्करा देती तो वह भी मुस्करा देती और रात को जब तारे झिलमिलाते तो वह भी
झिलमिला जाती। वह रंगो को एकदम सजीला और चमकदार बना देती। उङती तितलियों मे कभी
पीला तो कभी कत्था रंग भरकर उन्हें जीवांत कर देती ”
किसी मनचले लङके ने
उसके कॉलेज के दिनों मे आकर पूछा था, “ओए, ये पेन्टिंग तू कैसे बनाती है? एक मेरी और अपनी साथ मे बना ले बहुत जंचेगी।”
काजल की आंखो मे
गुस्सा और नफरत उतर आयी वह अपने पेन्टिंग को इकट्ठा की और वहॉ से चलने को हुई कि
वह उसके हाथो को पकङ लिया और बोला “ज्यादा शान-शौकत करोगी तो यहं से जा भी नही पाओगी।बस एक बार हां कर दो
दूसरों से ज्यादा सबकुछ दूंगा।”
उसका भी पारा चढ
गया।”भेङिये के शक्ल मे
कोई शेर नही हो जाता है मै चुप तो इसका मतलब अन्यथा मे मत लेना। जिस ब्रश से रंग
भरती हुं उसी ब्रश से जीभ काटकर हाथ मे रख दूंगी।”
वह वहॉ से चल दी
लेकिन वह उसे आंखे बङी करके घूरता रहा।
अगले दिन जो हुआ वो
काजल के ख्वाबों के पन्ने पर नही लिखा था वह कॉलेज से जब अगले दिन निकल रही थी तो
उल लङके ने एक रॉड से उसकी कलाई पर तेजी से मार दिया। उसकी कलाई उसी वक्त झूल गयी।
वह दर्द और तङप से चीखने लगी और वह मुस्कराता हुआ चला गया। बावजूद इसके वह ललकारते
हुए बोली “जाओ, मैने तुम्हे
माफ करती हुं भले ही तुमने मुझसे मेरा हाथ छीना है लेकिन मेरे ख्वाब और सपने हमेशा
हावी रहेगें।”
वह लगातार एक साल तक
अपने हांथो की अंगुलियों और पंजे को चलाने की कोशिश करती रही। उसके गुनगुनाने के
शब्द थे “यह भी एक दिन गुजर
जायेगा,नये कल की किरणे दस्तक देगीं, आस्था से देखती रहो ईश्वर की ओर, दुनिया फिर
से तुम्हारा स्वागत करेगी।” वह दुनिया की नजर मे टूट चुकी थी, हार चुकी थी। लेकिन अपनी नजरों मे
वह उठ रही थी,शुरू हो रही थी,चमक रही थी।इस दुनिया मे सबसे मुश्किल है नया करना और
गजब की बात है कि सबसे आसान भी है नया करना।
“हम कलाकार होते हैं
हमारे लिए तो रोड का किनारा बना है जब तक जमीं पर हैं तब तक नजारें हैं और जब आसमॉ
मे होते हैं तो सितारें हैं हर किसी को जमीं से आसमॉ तक जाने मे खून, पसीने और
आंसुओं को कई बार तो मिलाना ही पङेगा फिर देखतें हैं दर्द और परेशानियां कितनी
नाकामयाब कोशिशें करती हैं।”
![]() |
| खूबसूरत ख्वाब |
“हांथो मे जादू है कि
हर रंग को ही खूबसूरत बना देती हो इतनी कल्पना और ताकत कहां से पाती हो?क्या तुम्हारे ख्वाब सच मे इतने चमकीलें है जो
तुमसे नजारे बदलने को कहते हैं।”
प्रतीक उसके पास
बैठे उन तस्वीरों को देखकर बोला जो अभी-अभी वह बना रही थी
“ ख्वाबों और सपनों मे रहने की आदत तो मेरी थी तुम
कब से रहने लगे?”
“बस, तुम्हारे साथ
रहते-रहते। तुम इतना अच्छा सोचती कैसे हो कि दर्द इन हांथो का चला जायेगा लेकिन ये
खूबसूरती रह जायेगी भले मुझे असहनीय पीङा आज होती है और मेरे हांथ आज ब्रश पकङने
के ठीक से काबिल भी नही है लेकिन ये खूबसूरती लोगों के दिलों मे बस जायेगी और मै
हमेशा जिन्दा रहुंगी।”
“बस कर जाती हुं
क्योकिं यही मेरा श्रृगांर है”
“मै हालात के सामने
कमजोर नही हो सकती हुं गिङगिङाना और पश्चाताप नही कर सकती हुं मै इस बात को को
लेकर ही काफी खुश हुं कि अब भी मै अपने सपने को जी पा रही हुं क्या यह मेरे लिए
किसी वरदान से कम है जिन्दगी को मैने नही जिन्दगी ने मुझे चुना है मै आत्मकरूणा की
अपेक्षा बिल्कुल नही करती हुं”
वह उठा और घूमने
लगा।“मै तुम्हारी इच्छाशक्ती
को सलाम करता हुं और मानता हुं कि तुम बेहतरीन से बेहतरीन करोगी।आकाश मे लोहा भी
उङ सकता है बशर्ते उसमे भी पंख लगे हो।”
वह एकटक उसकी ओर
देखने लगी।“मै तुम्हे यहॉ से
बाहर दुनिया मे ले चलना चाहता हुं फिर देखो कितनी बेहतरीन चीजे हैं हमारे लिए
जिन्हे हम देख नही पा रहें हैं तुम बस रंग दो सारा ये जहॉ जिसमे हर कोई मुस्करा
उठे। एक बार फिर से दम भर ले।”
वह फिर पास आया और
उसका हांथ पकङकर पूछा, “क्या तुम करना चाहोगी?”
चमचमाती आंखो मे
जवाब था ‘बेशक’
मुस्कराते रहिए, खुश रहिए
और पेङो की रक्षा कीजिए

No comments:
Post a Comment