"मैं कितनी बार खुद को बेपर्दा करूँ, आखिर कितनी बार खुद को सही साबित करूँ और कितनी दफा अपने आप को लोगों के सामने बताऊँ कि मुझे दोस्ती, साथ, एहसास की जरूरत है, मुझे पलों को साथ मिलकर गुजारने वालों की जरूरत है"
आरुषि कैफे में चलते हुए म्यूजिक के बीच आज निलय पर बिफर गयी।
निलय और उसकी दोस्ती अभी कुछ महीनों पहले हुई है। वह एक फैशन डिजाइनर है और बेंगलोर में रहती है। निलय फ्लावर्स का बिजनेस करता है।
कैफे में एक तरफ स्क्रीन पर गेम खेल रहें लोग भी थोड़ा चौंक पड़ें कि क्या हुआ! वेटर को पानी का गिलास लेकर उनकी टेबल पर जाने के लिए मैनेजर ने इशारा किया।
"आरू मेरा मतलब" निलय बोल पाता कि आरुषि ने हाथों से चुप रहने का इशारा कर दिया।
'निलय मैं आज तुम्हें कुछ बताती हूं, बस ऐसे सुनना कि जिंदगी में दुबारा कभी न बताना पड़ें।'
निलय का चेहरा एकदम से उतर गया। वह कई दिन से जब भी आरू से बात करता तो पूछ लेता तुम्हारी जिंदगी तो बहुत मजेदार रही है, तुम्हे रोमांस के बारे में बहुत पता होगा, तुम्हे लाइफ के बारे में पता ही होगा क्योंकि तुम्हारे अब तक दो ब्वायफ्रेंड रह चुके हैं। वह अक्सर जब मैसेज करता तो बस इसी बात को एहमियत देता। आज जैसे ही वो कैफे में आया और आर्डर करने के बाद कहा ही था कि,'आरू डार्लिंग तुम मुझसे नही बता सकती '
वैसे ही आरू बोल पड़ी,
'मैं कितने लोगों को जवाब दूँ, कैसे खुद को संभाल कर खड़ा करूँ जब मेरे पास कोई है ही नहीं जो मुझे समझ सके'।
निलय से नजरें हटाकर उसने अपने आंखों में आने वाले आंसुओं को संभाला और बोली,
'बचपन में परिवार तो बड़ा था पर साथ में नहीं रहते थे हमलोग, पापा अपनी दुनिया में, मम्मी अपनी दुनिया मे व्यस्त रहती थी। कब रोतो थी, कब हंसती थी किसी को कोई भी मतलब नही था। क्या जरूरत थी किसी को मेरी परवाह करने की , पैसा खूब सारा था ही लेकिन समय किसी के पास नही था , वक़्त किसी के पास नही था। अंदर-अंदर हर दिन घुटती थी ,रोज-रोज मरती थी। कोई आया ,दोस्त बना, जिसके साथ खुद को बांटना चाहती थीं ।तन्हाई से निकलकर दुनिया में जीना चाहती थी। मैं इतनी मजबूत नही थी कि अकेले आगे चल पाती। मगर उसको मुझसे कुछ और चाहिए था और मुझे कुछ और।'
वेटर ने पानी भरा दो गिलास रखा और पूंछा,'कोल्ड कॉफी विथ आइसक्रीम या बिना आइसक्रीम के साथ?'
निलय एक लंबी सांस लेते हुए वेटर की ओर घूरा। वेटर मामला समझते हुए किचन की ओर गया और दोनों कॉफी आइसक्रीम के साथ बनाने के लिए बोल दिया।
'आरू, बेबी , मैं बस ये कहना चाहता था...'
बात पूरी होती इससे पहले वो भर्राए शब्दों में बोली,'जिस अकेलेपन और तन्हाई से बचने के लिए एक अजनबी के साथ मैंने खुद को भुलाकर उसकी खुशी की परवाह की उसी ने अकेला कर दिया।'
अचानक गेम खेल रहा लड़का चीखा,'ओह्ह यस, मैंने जीत लिया।' जब वो देखा कि आस-पास के सब लोग उसको देखने लगे तो थोड़ा झेंप गया। वेटर आइसक्रीम वाली दो कोल्ड कॉफी टेबल पर रखकर चला गया।
'किसी ने फिर सम्भाला तो मैंने भी पिछला भूलकर आगे बढ़ना चाहा क्योंकि वो भी मेरे जैसा अकेला, तन्हा , टूटा हुआ था। लेकिन न जाने कब उसको मेरे माथे पर आए हुए शिकन से ज्यादा ब्रा स्ट्रेप्स दिखने लगे,न जाने कब मैं उसके लिए प्यार से ज्यादा प्यास बन गयी और न जाने कब सपनों की उम्मीद से, साथ की नींद बन गई।'
'सोसायटी बहुत सारा इल्जाम लगाती है , बहुत सवाल पूछती है लेकिन कभी ये क्यों नही बताती कि उसे लोगों के जिंदगी में बुराई क्यों दिखती है? उस इंसान के साथ जो बुरा होता है वो क्यों नही दिखता? लोगों के साथ उनके अकेलेपन, दर्द, कमजोरी में खड़ी क्यों नही होती है ?जिंदगी मे चोट लगने पर उनको अलग क्यों खड़ा कर देती है'?
उसने आंखों से आंसू पोंछा और निलय की ओर आंखे करके बोली,' समाज उसको मजाक बना देता है जो अपने ढंग से खोल से बाहर निकलकर जीने की कोशिश करता है और संभालने की कोशिश करता है।'
वह खड़ी हुई और मुस्कराते हुए बोली
'लेकिन मिस्टर निलय अब मैं मजबूत हो चुकी हूं,मैं अब खुश रहना चाहती हूं ,आजाद परिंदो के तरह उड़ना चाहती हूँ।
Thanks
© Abhishek Vibha
No comments:
Post a Comment